अब नीतीश सरकार की खुली पोल, विज्ञापनों पर खर्च किये 500 करोड़ रुपए

नई दिल्ली। सरकारी पैसे से विज्ञापनों की बंदरबांट में बिहार की नीतीश कुमार सरकार भी केंद्र की मोदी सरकार से पीछे नहीं हैं। नीतीश कुमार की सरकार ने पांच सालों में करीब 500 करोड़ रुपए विज्ञापनों पर खर्च किए हैं।

जबकि नीतीश कुमार के पहले वाली सरकार (राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली आरजेडी की सरकार) के कार्यकाल (2000-01 से 2004-05) में विज्ञापन पर मात्र 23.48 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

विज्ञापनों पर किये गए खर्च में नीतीश सरकार ने सबसे ज़्यादा रकम चुनावी वर्ष में खर्च की है। द वायर के मुताबिक सूचना का अधिकार (आरटीआई) से मिली जानकारी में पता चलता है कि नीतीश कुमार की सरकार ने पांच सालों में करीब 500 करोड़ रुपए विज्ञापनों पर खर्च किए हैं।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस और आरजेडी के साथ महागठबंधन वाली नीतीश सरकार ने 2014-15 में विज्ञापन पर करीब 84 करोड़ रुपए खर्च किए थे। वहीं 2015-16 में नीतीश सरकार ने विज्ञापन पर करीब 99 करोड़ रुपए खर्च किए।

जबकि इसके अगले वित्त वर्ष (2016-17) में विज्ञापन पर लगभग 87 करोड़ रुपए खर्च किए गए। वित्त वर्ष 2017-18 में भी विज्ञापन पर करीब 93 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। वहीं 2018-19 में विज्ञापनों की खर्च सीमा ने बाकी वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ डाले। जेडीयू और बीजेपी की साझा सरकार ने चुनावी साल में मीडिया के लिए खजाने खोल दिए। टीवी, रेडियो और न्यूज पेपर में विज्ञापन करीब 134 करोड़ रुपए का विज्ञापन दिया।

गौरतलब है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भी विज्ञापनों पर पैसा पानी की तरह बहाने के आरोप लगते रहे हैं। सूचना का अधिकार (आरटीआई) से मिली जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार ने पांच वर्षो में विज्ञापन पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च किये। इसमें करीब 2374 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 670 करोड़ आउटडोर पब्लिसिटी पर खर्च किये गए। मोदी सरकार द्वारा विज्ञापन पर किया गया व्यय पूर्व की यूपीए सरकार से दोगुना है।

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