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अब चीन खामोश रहेगा, कश्मीर में अमन होगा, देश में बेरोज़गारी खत्म हो जायेगी,बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी…

ब्यूरो (राजाज़ैद) : तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले के बाद कुछ लोगों की प्रतिक्रियाएं सुनकर ऐसा लगा जैसे देश में तीन तलाक के अलावा कोई मुद्दा ही नहीं है और देश की सभी समस्याओं के लिए मुसलमानो में तीन तलाक का चलन ही ज़िम्मेदार था।

सोशल मीडिया पर समाज के एक विशेष वर्ग से जो टिप्पणियां की हैं उन्हें पढ़कर मुझे यही लगा कि शायद कश्मीर में अशांति से लेकर गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी के चलते बच्चो की मौत के लिए तीन तलाक ज़िम्मेदार थी और अब सुप्रीमकोर्ट ने तीन तलाक पर रोक लगा दी है तो देश की सभी समस्याओं का हल हो गया है।

इस मामले में सरकार और मीडिया की भूमिका भी कुछ ऐसी ही थी जैसे तीन तलाक के कारण ही देश में बेरोज़गारी बढ़ रही हो अथवा तीन तलाक के चलन के कारण ही चीन के साथ विवाद पैदा हुआ हो। सोशल मीडिया पर तीन तलाक को लेकर कुछ इस तरह के सन्देश फैलाये जा रहे हैं जिन्हे पढ़कर लगता जैसे न जाने उनका कौन सा बड़ा एजेंडा पूरा हो गया हो। लगता है देश में बुलेट ट्रेन शुरू किये जाने के काम को तीन तलाक ने रोक रखा था।

जहाँ तक महिला अधिकारों की बात है तो सरकार सिर्फ एक धर्म की महिलाओं के कल्याण के बारे में कैसे सोच सकती है। अगर महिला अधिकारों की फ़िक्र है तो उन महिलाओं की सुध भी ली जाए जिन्हे बिना तलाक किये छोड़ दिया गया है या जिनके पति के निधन के बाद उन्हें जबरन वाराणसी और वृंदावन के आश्रमों के रखा गया है।

सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी नेताओं और मीडिया चैनलों ने जिस तरह पूरे मामले पर पीएम मोदी को हीरो बनाकर पेश किया उस से लगता है जैसे बीजेपी नेता सुप्रीमकोर्ट के फैसले का साँसे थाम कर इंतज़ार कर रहे थे। तीन तलाक मुस्लिम समुदाय का मामला था इसे महिला अधिकारों से जोड़ कर बीजेपी ने अपना मूँह तो साफ़ कर लिया लेकिन क्या बाकी उन महिलाओं के अधिकारों के बारे में भी कोई कानून नहीं लाना चाहिए जो शादीशुदा होकर भी एक विधवा जैसा जीवन व्यतीत करने को मजबूर है ?

तीन तलाक पर कोर्ट का जो भी फैसला हो उस पर अब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सरकार के बीच की बात रह गयी है। कोर्ट अपना निर्णय दे चूका है। अब इस पर सरकार को कानून बनाना है। गौर करने योग्य बात यही है कि तीन तलाक पर पाबंदी के बाद अब सरकार किस तरह का कानून लाती है और क्या इस कानून को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है अथवा नहीं ? कानून आने के बाद ही असली मंशा का पता चलेगा।

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