अब इलाहाबाद का नाम बदलेगी योगी सरकार, 1583 में अकबर ने रखा था नाम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलने के बाद अब योगी सरकार की नज़रें इलाहाबाद पर लगी हैं। शुक्रवार को दीप्ती सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने इस आशय की जानकारी देते हुए मीडिया से कहा कि सरकार इलाहबाद का नाम बदलकर प्रयाग करना चाहती है।

मौर्या ने कहा कि इलाहाबाद का नाम बदले जाने को लेकर केबिनेट के सभी सदस्यों की एक राय है। जल्दी ही सरकार इस विषय में फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि जब इस बारे में फैसला लिया जाएगा तो सरकार की तरफ से सभी को जानकारी दी जाएगी।

फिल्म पद्मावत उत्तर प्रदेश में रिलीज की जाएगी अथवा नहीं ? इस सवाल के जबाव पर मौर्या ने कहा कि हम शीर्ष अदालत के निर्णय का अध्यन करेंगे। अदालती आदेश का अध्यन करने के बाद ही इस विषय में कोई टिप्पणी की जायेगी।

वहीँ राम मंदिर निर्माण को लेकर सिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि यह मामला अदालत के विचाराधीन है। अदालत के फैसले के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत का कोई आदेश नहीं आ जाता तब तक हम लोग फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं।

बता दें कि ऐतिहासिक दृष्टि से इलाहबाद का बहुत महत्व है। सन 1583 में मुगल बादशाह अकबर द्वारा इलाहबाद शहर का नाम रखा गया था। हिन्दी नाम इलाहाबाद का अर्थ अरबी शब्द इलाह (अकबर द्वारा चलाये गए नये धर्म दीन-ए-इलाही के सन्दर्भ से, अल्लाह के लिये) एवं फारसी से आबाद (अर्थात बसाया हुआ) – यानि ‘ईश्वर द्वारा बसाया गया’, या ‘ईश्वर का शहर’ है।

अकबर ने यहां संगम के घाट पर एक वृहत दुर्ग निर्माण करवाया था। इलाहबाद पर मराठो के भी आक्रमण होते रहे थे। इसके बाद अंग्रेजों के अधिकार में आ गया। 1756 में इलाहाबाद के किले में थल-सेना के गैरीसन दुर्ग की स्थापना की थी। १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इलाहबाद भी सक्रीय रहा था।

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