खबर का असर: गरीबों का राशन खाकर तंदरुस्त हो रहे कोटेदार की बिगड़ सकती है सेहत, होगी जांच

ब्यूरो(राम मिश्रा,अमेठी):भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी कार्ड धारकों को राशन मुहैया कराना उद्देश्य है । इसमें बीपीएल व अन्त्योदय राशन कार्ड धारकों को सस्ते दर पर राशन उपलब्ध कराना है।

इसके विपरित प्रदेश भर में बड़ी संख्या में अपात्र लोगों ने भी बीपीएल व अन्त्योदय कार्ड बनवा लिया है। वहीं इसके उल्टे बड़ी संख्या में पात्र इस कार्ड से वंचित रह गए है।

शुकुल बाजार ब्लाक के ग्राम शेखपुर भंडरा निवासी अयाज अहमद पुत्र नौशाद अली ने आरोप लगाया कि उनके गांव के कोटेदार अबरार अहमद ने अपनी पत्नी रेहाना बानो के नाम से अंत्योदय कार्ड बनवा रखा है, जिसका कार्ड नम्बर 2701 है।

यही नहीं आरोप है कि कोटेदार ने अपने भाभी इस्लामुन निशां पत्नी अशफाक अहमद (कार्ड न०3980) का भी अंत्योदय कार्ड बनवाने में सफलता पा ली और यह सारा खेल ग्राम प्रधान और कोटेदार की मिली भगत व आपूर्ति विभाग की मेहरबानी से चल रहा है। इसी मेहरबानी वाली दृष्टि के कारण ही ग्राम प्रधान के छोटे भाई अफसरी बानो पत्नी हारून अहमद (कार्ड न०7696) का अंत्योदय कार्ड जारी कर दिया गया है ।

अयाज़ अहमद ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी सबीना बानो के आधार कार्ड इस्तेमाल कर गाँव के ही एक परिवार का अंत्योदय कार्ड-(4884) जारी कर दिया है। यह परिवार दूसरे समुदाय से आता है और मजे की बात यह है इस परिवार का मुखिया अयाज़ अहमद की सासू मां तारबून निशां को दिया गया है ।
अयाज का आरोप है उक्त लोग अंत्योदय के पात्र नहीं है। जिसके लिए अयाज ने जिले के अधिकारियों से जांच और उचित कार्रवाई की मांग की थी।

जिलाधिकारी ने बाद जांच कारवाई की बात कही-

बता दे कि राशन कार्ड में अनिमियता और भ्रष्टाचार के इस प्रकरण को ‘लोकभारत’ ने “घपले और घोटाले से जूझ रहा राशनकार्ड सिस्टम? जांच की मांग”, नामक शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद जिले के संवेदनशील जिलाधिकारी प्रशान्त शर्मा ने मामले को गम्भीरतापूर्वक लेकर बाद जांच उचित कार्रवाई की बात कही है ।

अंत्योदय की है यह पात्रता-

मिली जानकारी के मुताबिक जिस परिवार का मुखिया विधवा हो या लगातार बीमारी ग्रस्त हो, उसके जीविकोपार्जन का कोई निश्चित साधन या सामाजिक सहारा न हो। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति अथवा एकल पुरुष या एकल महिला, जिनके जीवन यापन का साधन न हो तथा सभी आदिवासी व जनजाति परिवार के लोग अंत्योदय के पात्र होंगे।

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