अपने ही बनाए जाल में फंस गयी बीजेपी, सबसे बड़ी पार्टी लेकिन सत्ता से दूर

नई दिल्ली। कर्नाटक में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आई है लेकिन वह बहुमत से चूक गयी जो अब उसे भारी पड़ता दिख रहा है।

सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए माथापच्ची में जुटी है लेकिन सत्ता तक पहुँचने के उसके रास्ते में उसकी पुरानी करतूतें ही रोड़ा बन रही हैं।

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को 104, कांग्रेस को 77 और जनता दल सेकुलर को 38 सीटें मिली हैं वहीँ दो सीटें अन्य के खाते में गयी हैं। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को राज्य में सरकार बनाने के दावा पेश करना चाहिए लेकिन वह बहुमत के लिए ज़रूरी 113 विधायको की सूची राज्यपाल को देने में असमर्थ है।

वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस की 78 सीटें और जेडीएस की 37 सीटें मिलाकर 115 सीटें हो रही हैं जो बहुमत से दो सीटें अधिक है। यदि अन्य दलों के दो विधायको को और जोड़ लिया जाए तो बहुमत से चार सीटें अधिक हो जाती हैं।

कर्नाटक में सबसे बड़े दल के कारण राज्यपाल से सरकार गठन के लिए आमंत्रित किए जाने की बीजेपी की मांग पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी में अब नियम चेंज नहीं हो सकते।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में अचानक सिंगल लारजेस्ट पार्टी का हक कैसे हो गया? उन्होंने सवाल पूछा कि गोआ, मणिपुर और मेघालय में हम सबसे बड़े दल थे तब हमें सरकार बनाने का मौका क्यों नहीं मिला? क्या 5 साल जेडीएस का CM होगा, के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने कोई डिटेल अभी तय नहीं किया है. हम दोनों दल मिलाकर 117-18 एमएलए हैं. हम स्थाई सरकार देंगे।

जानकारों की माने तो बीजेपी कर्नाटक में सरकार बनाने की स्थति में होती लेकिन उसकी पुरानी करतूतें ही उसके आड़े आ रही हैं। गौरतलब है कि गोआ, मणिपुर और मेघालय में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी। इसके बावजूद वहां के राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए बीजेपी को न्यौता दिया।

अब कर्नाटक में कांग्रेस गोआ, मणिपुर और मेघालय का उदाहरण सामने रख रही है और बीजेपी को याद दिला रही है कि आज जो कर्नाटक में होगा वह बीजेपी पहले तीन राज्यों में कांग्रेस के साथ कर चुकी है।

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